बिहार के जमुई जिले में नाबालिग छात्रा के साथ हुई बदसलूकी की घटना के खिलाफ आइसा (ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन), रांची इकाई और ऐपवा (अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला संगठन) द्वारा मंगलवार 22 सितंबर को रांची स्थित अल्बर्ट एक्का चौक पर प्रतिवाद सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर महिलाओं की आज़ादी पर सामंती-पितृसत्तात्मक पहरे के खिलाफ जोरदार हमला किया गया।
प्रतिवाद सभा में शामिल आइसा राज्य सचिव त्रिलोकी नाथ ने कहा कि आज बिहार के जमुई जिले सहित देश में महिलाओं के खिलाफ दुर्व्यवहार, रेप और बलात्कार की घटनाएं तेजी से हो रही हैं। जबकि बिहार की डबल इंजन सरकार के मुख्यमंत्री ने ही कभी कहा था कि आप रात के 12 बजे खाना खाकर निकलें और किसी भी महिला के साथ कुछ हो जाता है, तो मैं सुबह इस्तीफा दे दूंगा।
ऐपवा से नंदिता भट्टाचार्य ने कहा कि आज हम देख रहे हैं कि भाजपा सरकार ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का नारा देती है लेकिन सड़क से लेकर स्कूल-कॉलेज में पढ़ने वाली लड़कियां भी सुरक्षित नहीं हैं।
आइसा रांची जिला अध्यक्ष विजय कुमार ने कहा कि इस घटना को केवल एक अपराधी को सजा देकर नहीं रोका जा सकता है। आज हम देख रहे हैं कि बड़े-बड़े मंचों और कथित कथावाचकों द्वारा यह कहा जाता है कि लड़कियों और महिलाओं को शाम होते ही घर चले आना चाहिए, हमेशा पुरुष साथी के साथ रहना चाहिए। वे किसी भी तरह से खुली सड़क पर बेखौफ चलने का अधिकार नहीं रखती हैं। इस तरह का वक्तव्य देने वालों पर जब तक कार्रवाई नहीं होगी, तब तक पितृसत्ता और सामंतवादी समाज महिलाओं पर जुल्म करते रहेंगे।
आइसा रांची जिला सचिव संजना मेहता ने कहा कि आज जरूरत है कि महिला विरोधी हर तरह के बयान पर प्रशासन और सरकार कड़ी नजर रखें। इस तरह की घटना के लिए मैसेज, धमकी और वक्तव्य देने वालों के बारे में जैसे ही किसी तरह की जानकारी सामने आए, उन पर कठोर कार्रवाई की जाए। साथ ही, एनकाउंटर में गोली चलाने के बाद कार्रवाई करने की बात कहकर मुद्दे को छात्राओं को न्याय देने से जोड़ना संवैधानिक नहीं है और यह किसी भी न्यायिक प्रावधान के तहत नहीं आता है। जरूरत है कि सही तरीके से जांच-पड़ताल कर उनके लिंक किन-किन लोगों से हैं, इसका पता लगाया जाए और सभी पर कार्रवाई कर कठोर सजा सुनिश्चित की जाए।
(विशद कुमार वरिष्ठ पत्रकार हैं।)